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Motivational Story- Never Give Up


Motivational Story- Never Give Up

यह कहानी है। दो मेंढकों की जिसमें एक पतला था और दूसरा मोटा। दोनों जंगल के एक छोटे से तालाब में साथ रहा करते थे। बचपन के दोस्त थे। दोनों साथ में ही खेलते कूदते बड़े हुए थे। वे दोनों दिनभर तालाब में कूदते उछलते गप्पे मारते और मस्ती किया करते थे। उन दोनों को ही तालाब के आसपास के इलाकों की नई नई जगहों में जाकर घूमना अच्छा लगता था।

एक दिन ऐसे ही साथ में घूमते हुए दोनों जंगल के बाहर एक खेत में पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि एक ग्वाला अपने गाय से दूध निकाल रहा था। उन्होने कभी भी किसी को ऐसे दूध निकालते हुए नहीं देखा था। ग्वाले ने दूध निकाल कर एक बाल्टी में भरकर रख दिया। वे दोनों उस दूध को देखकर बड़े आश्चर्य में थे क्योंकि उन्होने आज से पहले यह कभी नहीं देखा था। उन्होंने तो जंगल में केवल तालाब का गंदा पानी ही देखा था। कुछ देर सोचने के बाद उन दोनों ने डिसाइड किया कि इस सफेद पानी में तैरने का मजा ही कुछ और होगा।

दो मेंढ़कों की कहानी

यह सोचकर उन दोनों ने एक साथ बाल्टी में छलांग लगा दी। वहां जाकर वो देखते हैं अरे वह सफेद पानी हमने तो कभी देखा ही नहीं। ये क्या चीज होती है। दोनों को मजे करने तो पसंद थे ही। वे दोनों वही मस्ती करने लग जाते हैं। वे तैर रहे होते हैं। कभी वो गोता मार रहे होते हैं, वे निकल रहे होते हैं। खूब उछल कूद करने के बाद। पूरे मजे करने के बाद। वो जो मोटा वाला मेंढक होता है वो कहता है चल यार अब घर जाने का टाइम आ गया। जंगल वापस चलते हैं। वो पतला मेढक भी कहता है। हां यार चलो अब चलते हैं। वे दोनों बाल्टी से बाहर छलांग लगाने की कोशिश करते हैं। पर वो बाल्टी बहुत बड़ी होती है। वे छलांग लगा नहीं पाते। वो दोनों बाल्टी के किनारे जाकर बाल्टी की दीवारों से छलांग लगाने की कोशिश करते हैं। पर वो देखते हैं कि वहां बहुत ज्यादा फिसलन है। वे जब भी कूदने की कोशिश करते हैं, उनके पैर फिसल जाते हैं। -Motivational Story- Never Give Up

Motivational Story In Hindi

उन्होंने लगातार कई बार प्रयास किया। कभी बाल्टी के बीच से तो कभी बाल्टी के किनारे उनकी दीवारों के सहारे कूदने का लेकिन दूध की चिकनाहट और उसकी फिसलन की वजह से वे बाल्टी से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। अब जो पता वाला मीठा होता है वो मोटे मेंढक को बोलता है। भाई देख निकलना तो है। हम इस बाल्टी से बाहर। इसलिए हमें कोशिश तो करती रखनी पड़ेगी पर हमें बहुत बार कोशिश करके देख ली। इसलिए मुझे लगता है। हम खुद तो इस बाल्टी से बाहर नहीं निकल पाएंगे क्योंकि यहां बहुत ज्यादा फिसलन है तो हम क्या करते हैं। हम तैरते रहते हैं। अगर हम तैरते रहेंगे तो कोई न कोई आकर हमें बाल्टी से बाहर निकाल ही देगा। मोटा मेढ़क उस पतले मेंढक की बात मान लेता है और दोनों तैरते रहते हैं। एक घंटा दो घंटे तीन घंटे हो गए। वो तैरते रहते हैं। कोई आकर भी बाल्टी से बाहर नहीं निकलता और जो मोटा मेढक होता है वो तैरते-तैरते थक जाता है। वो कहता है भाई अब मैं और पैर नहीं चला पाऊंगा। कई घंटों से तैरते तैरते मैं थक चुका हूं। वो पतला मेढंक कहता है भाई देख अगर तू पैर चलाना बंद कर देगा तो तू डूब जाएगा और कुछ देर में सांसें रुक जाएंगी और तो मर जाएगा। अपुन को मरना नहीं है। भाई तू पैर चलाता रहा। वो मोटा मेढक थोड़ी देर तक पैर और चलता है। –Motivational Story- Never Give Up

Motivational Story- Never Give Up
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Motivational Story For Students

फिर कहता है भाई देख हमने बहुत साथ दिया एक दूसरे का। हम दोनों बचपन के दोस्त हैं। आपस में बहुत मस्ती की हंसी ठिठोली की हमेशा साथ रहे, लेकिन मुझे लगता है कि आज सब खत्म होने वाला है। आज हो सकता है कि मेरी जिंदगी का आखरी दिन हो, मैं और मेहनत नहीं कर सकता। मैं और पैर नहीं चला सकता और अब शायद मैं डूबकर मर जाऊंगा। और उस पतले मेढक की आँखों के सामने उसका वह बचपन का दोस्त डूबकर मर जाता है। यह सब देखकर वह पतला मेढक और ज्यादा तेजी से पैर चलाने लगता है। उसके अंदर आग लग जाती है कि अब कैसे भी करके मुझे इस बाल्टी से बाहर निकलना ही है। मुझे हार नहीं माननी। अगर मैंने भी हार मान ली तो मैं भी मर जाऊंगा। उसकी आखों से आंसू निकल रहे हैं पर वो और तेज और तेज पैर चलाता जा रहा है।

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लेकिन जैसा कि हम सब जानते हैं कि अगर थोड़ी देर तक दूध कुछ लाया जाए तो उसमें से मक्खन बाहर आने लग जाता है और बिल्कुल ऐसा ही हुआ क्योंकि बहुत घंटों से वो दोनों मेढक उस दूर में पैर चला रहे होते हैं, इसलिए उस दूध से मक्खन बाहर आने लग जाता है। साथ ही कुछ घंटों से रखे रहने की वजह से दूध कुछ जमने भी लगता है। दही जैसा सेवा देने लग जाता है। दूध के जमने और मक्खन के बाहर आ जाने से मेढ़क देखता है कि दूध थोड़ा गाढ़ा सा हो गया है। अब वो पहले जैसा चिपचिपा नहीं रहा। वह उस मक्खन के ऊपर बैठकर पूरे जोरों से एक छलांग मारता है और बाल्टी के बाहर आ जाता है। बाल्टी से बाहर आने के बाद कुछ देर तक तो उसे समझ नहीं आता कि आज उसके साथ क्या हुआ। उसका सबसे अजीज दोस्त उसका बचपन का यार आज उसकी आखों के सामने डूबकर मर गया था और उसकी मौत क्यों हुई क्योंकि उसने हार मान ली। अगर वो भी थोड़ी देर तक और पैर चलाता रहता हारना मानता तो आज वो भी जिंदा होता तो आज वो ही बाहर आ जाता। -Motivational Story- Never Give Up

वो पतला मेढक बाहर निकलने के बाद जंगल जाता है। जंगल में जाने के कुछ दिनों के बाद वह मेढक एक लेडी मीठा के सा सारी कर लेता है। शादी के बाद उसके बच्चे होते हैं। वह अपने बच्चों का नाम अपने उस मोटे दोस्त के नाम पर रखता है और अपने बच्चों को रोज शाम को वह पतला मेढक यही कहानी सुनाता है कि मेरा एक मोटा दोस्त हुआ करता था, जिसके साथ मैं पूरे जंगल में घूमा करता था। हम सुबह से शाम तक खेला करते थे। एक दिन हम दोनों एक बाल्टी में गिर गए, जिसमें दूध था और मेरा जो दोस्त था, उसने हार मान ली क्योंकि उसने हार मान ली, इसलिए वो मारा गया। मैं तो बच्चों को भी यही सिखाना चाहता हूं कि जिंदगी में चाहे कुछ भी हो जाए, लेकिन कभी हार मत मानना। -Motivational Story- Never Give Up

अगर तुम लोगों ने हार मान ली तो तुम्हारा भी वही हश्र होगा जो मेरे दोस्त का हुआ। दोस्तों इस कहानी से हम सीख सकते हैं कि दूध का दही जरूर बनेगा, लेकिन उसमें वक्त लगता है और अगर हमने वक्त से पहले हार मान ली तो हमारा भी वही हाल हो सकता है। हो सकता है हमें जिंदगी में अभी तक वो सब ना मिला हो जो हम चाहते हैं, लेकिन लाइफ में मिलता उन्हें ही है जो कभी हार नहीं मानते। ये भी हो सकता है कि हमें वो सब ना मिले जिसे हम हासिल करना चाहते हैं। लेकिन हम ये सुकून कौन छीन पाएगा कि हमने उस चीज को पाने के लिए आखिरी दम तक प्रयास किया। एक बात हमेशा याद रखना दोस्तों हम हारते तब नहीं जब लोग हमसे कहते हैं कि तू हार गया बल्कि हम हार तब जाते हैं जब हम खुद हार मान लेते।



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